
...
"लिखती है कलम..
जब कभी..
ह्रदय के ताल..
चख लेते हैं..
सुमन की गर्मी..
और..
प्रश्नों की नरमी..
झुरमुट प्रकाश में..
निर्मल स्याही से..
मिलना गले..
किसी दिन..
दर्शनाभिलाषी --
कुछ तरबतर अश्रु..
कुछ अपरिचित स्मृतियाँ..
और..
कुछ बूँदें..
निर्मोही तेल की..!!!"
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10 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:
bhaut hi khubsurat abhivaykti....
अलग अंदाज़ .. बेहतरीन भाव
क्या बात है प्रियंका जी.
खूबसूरत लगी आपकी प्रस्तुति.
मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
प्रियंका जी...बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति...लाजवाब।
kalam bahut kuch kahti hai...
sundar rachna..
jai hind jai bharat
बहुत खुबसूरत
धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!
धन्यवाद शेफाली जी..!!
मेरे ब्लॉग पर आईयेगा प्रियंका जी.
आपका आना बहुत अच्छा लगता है.
धन्यवाद राकेश कुमार जी..!!
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