Sunday, July 7, 2013

'क्यूँ..'



...

"क्यूँ ख़्यालों में आते हो..
जानते हो आवारा हूँ..

क्यूँ प्यार बढ़ाते हो..
जानते हो ख़ानाबदोश हूँ..

क्यूँ पाबंदी हटाते हो..
जानते हो बदनाम हूँ..

क्यूँ दांव लगाते हो..
जानते हो नाकाम हूँ..

चले जाओ..

क्यूँ वक़्त लुटाते हो..
जानते हो गुमनाम हूँ..!!"

...

--यूँ ही..कभी-कभी..

4 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

Shaifali said...

Well written!

Beautiful.

Regards, Shaifali

http://guptashaifali.blogspot.com

संजय भास्‍कर said...

तभी तो मन कहता है ...."कुछ बात तो है"....बहुत ही अच्छी लगी मुझे रचना

शुभकामनायें !

Unknown said...

धन्यवाद शैफाली जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!