
...
"ख़ुद पे ही हँसता हूँ..
ख़ुद पे ही रोता हूँ..
जी भर जब लिखता हूँ..
ज़ख्मों को पीता हूँ..
स्याह रंग डालता हूँ..
वज़ूद के पन्ने पे..
माकूल तस्वीर पाता हूँ..
बंद रस्ते..खाली मकां..
रिश्तों की साँस..
खाली दीवार पे ढूँढता हूँ..
न कर मुझे पाने की ख्वाहिश..
हर शब जीता..हर सहर मरता हूँ..
होंगे दीवाने..हबीब बेशुमार..
रूह पे हैसियत की जिल्द रखता हूँ..!!"
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1 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:
धन्यवाद राजीव कुमार झा जी..!!
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