Sunday, June 28, 2015

'मेरे जौहरी..'





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"न आऊँ यहाँ..तो बेचैन हो जाते हैं..
जाने कितने पीर-बाबाओं के चक्कर लगाते हैं..
कितनी ही बार मोबाइल चैक करते हैं..और जो हैंग हो जाये अपनी 'रैम' के कारण..तो बस..'रीस्टार्ट सैशन'..

मन की बारिश में तन सूखा..और जिस्म नीलाम होने को उतारू.. मेरे जौहरी हो तुम..याद है न..??"

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--शुक्रिया #जां.. बेहिसाब रतजगे और एक टाइट हग.. <3 <3

2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

दिगंबर नासवा said...

बहुत खूब ... अदद जोहरी की को याद दिलाती रचना ..

priyankaabhilaashi said...

सादर धन्यवाद..दिगम्बर नास्वा जी..!!