Friday, January 6, 2012

'चाँद..'



...


"ऊँगलियों के पोरों पर छाले पड़ गये..
जिद थी..
चाँद की तनहा परत..
मैं ही बाँटू..!!!


...

12 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

Yashwant Mathur said...

वाह!

Atul Shrivastava said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत ख़ूब!!

Anonymous said...

wah wah wah kya bat hain
mere blog par bhi aaiyega
umeed kara hun aapko pasand aayega
http://iamhereonlyforu.blogspot.com/

Kailash Sharma said...

बहुत खूब!

संजय भास्‍कर said...

उम्दा सोच
भावमय करते शब्‍दों के साथ गजब का लेखन ...आभार ।

vidya said...

वाह..वाह....वाह...

Unknown said...

धन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद अतुल श्रीवास्तव जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद चिराग जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद कैलाश शर्मा जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!