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"हर लम्हा आँख नम कर जाते हो..
हर ख्वाब सज़ा कम कर जाते हो..१
पशेमां मौसम हुए जाते हैं..अब..
क्यूँ..तन्हाई में दम भर जाते हो..२
नूर से रंगी तस्वीर वो पुरानी..
फ़क़त..सांसों में जम* भर जाते हो..३
दर्द मचलता है चुपके-चुपके..
खामोशी से मुझमें रम जाते हो..४..
रिवायत-ए-मोहब्बत-ए-आलम..
दो गैरों को हम-दम कर जाते हो..५..!"
* जम = जाम..
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11 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:
bahot achchi lagi......
कल 15/09/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
पिछली टिप्पणी मे तारीख की गलत सूचना देने के लिये खेद है
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धन्यवाद!
धन्यवाद मृदुला प्रधान जी..!!
धन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!
आभारी हूँ..!!
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...
:-)
बहुत बढ़िया
बहुत खूबसूरत !
~तुम्हारी याद फूलों सी...
फक़त शबनम कर जाते हो..~
धन्यवाद रीना मौर्या जी..!!
धन्यवाद उपासना सियाग जी..!!
धन्यवाद अनीता जी..!!
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