Friday, August 31, 2012

'जिद..'




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"जिद है हमारी..

सूरज चाहिए अब..
तारे की पच्छी..

यादों का मौसम..
गुलमोहर की आगोश..

रेत के घरोंदें..
सरसों के खेत..

बैलगाड़ी की सवारी..

वो कच्चे आम..
वो मीठी इमली..
वो सौंधी मिटटी..

होली के रंग..
रामलीला का रावण..

जन्माष्टमी का मेला..

काका की जलेबी..
ताऊ के लड्डू..

चाचा का वो..
मलाई वाला दूध..

काकी का हलवा..
चाची का अचार..

ताई के गुँजे..


क्या दे सकोगे..

मेरा गुजरा बचपन..
वो खिलखिलाती हँसी..

सावन के झूले..

माँ का आँगन..
मिश्री-सी लोरी..!"

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'भीगी शब..'




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"दुनिया के मेले में बेकाबू हुए जाते हैं..
रूह की मस्ती में बेनकाब हुए जाते हैं..१

महफ़िल की चाहत..रुसवा ही करती हैं..
जाने किस राह फिर..चलते हुए जाते हैं..२

अब तक चिपके पड़े हैं..चाहत के अंगारे..
मुट्ठी में समंदर..कहाँ जलते हुए जाते हैं..३

भीगी शब..तन्हा महताब..आवारा साँसें..
क्या मुद्दत बाद भी..क़ैद हुए जाते हैं..४

ना आने का वादा..रिवायतों की होली..
क्यूँ..आखिर क्यूँ..पलते हुए जाते हैं..५..!"


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Thursday, August 30, 2012

'होली..'




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"बाँध सांसारिक-बंधन की डोरी..
भूल गयी भूत आँख-मिचौली..

क्यूँ खेली गयी ये झूठी होली..!!"

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Monday, August 27, 2012

'खंज़र..'




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"घोंप दो..
खंज़र कितने..
ना लहू बहेगा..
ना आँसू..
ता-उम्र खुदा रहेगा..
इक चेहरा तेरा..
धज्जी-ए-वजूद..
उड़ाने वाले..!!

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Thursday, August 23, 2012

'रंग..'






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"चाहत का तेरी..
रंग झड़ता नहीं..
मिटाऊं कितना..
ये धुलता नहीं..
कशिश ऐसी..
बढ़ती जाये..
चमक ऐसी..
चढ़ती जाये..
आओ..
गढ़ दो..
सिरे..
फिर से..
पहन तुझको..
हर शब..
खिल जाऊं..!!"

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Wednesday, August 22, 2012



चौरासी लाख जीव-योनिओं से जाने-अनजाने में मन वचन काया से हुई भूल के लिये हाथ जोड़कर बारम-बार क्षमा याचना करते हैं..खमाते हैं..!!

Monday, August 13, 2012

'झूठ की गठरी..'




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"मैं मंत्रमुग्ध हो सुनती रही..तुम्हारे हर झूठ की गठरी का भार सहती रही..हर शब्द गंगा-सा पवित्र मान ह्रदय की सूखी डाल पर छिड़कती रही..!!!

तुम भी ठहरे राजनीतिज्ञ, आखिर मेरे कोमल भावों को तोड़ गए..सूक्ष्म तंतुओं का ह्रास कर गए..कर ही गए कलुषित मेरी पावन धरती को, बसते थे जिसमें जीवन-राग..!!!! अब तुम ही कहो, कैसे बांधूंगी घुंघरूं को पायल और कैसे जड़ पाऊँगी कुंदन को तुम्हारी आँखों के पोर पर..??

याद है ना..हर साँझ चमचमाता था तुम्हारी आँखों में मेरी नथनी का हीरा और विस्मय से भर जाता था तुम्हारा चेहरा..!!! खिलखिलाती थी सरसों की खली और महकती थी कनक की हंसी..!!

आज सब ओझल है..विस्तृत हो चला है तुम्हारे तहस-नहस करने का अधिकार..!!!!

जो शेष..वो मेरा टूटा-फूटा अस्तित्व और कुछ अनमोल आँसू, जिनका दाम तुम लगा ना पाए..ए-मेरे रत्नों के व्यापारी..!!"

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Thursday, August 9, 2012

'वक़्त..'




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"जैसे ही दीवार-घड़ी में आठ बजे तुम याद आये..!!! वक़्त भी ना कितना अजीब है..जब ढेर सारा वक़्त था, तब भी वक़्त नहीं था.. और जब आज वक़्त नहीं है तो बरबस चाहती हूँ काश सारा वक़्त समेट लूँ, थाम लूँ वक़्त की सुईयां और खींच लाऊं तुम्हें फिर से करीब अपने..!!!

पर तुम..अक्सर दुनियादारी में ही उलझे रहते हो..मेरा ख्याल भी तुम्हारे ख्याल में नहीं आता कि कोई तुम्हारे बिना कितना अधूरा अकेला होगा..!!!! बहुत वक़्त गुज़र गया..अब आ भी जाओ ना..कि रात के सारे पहर तुम बिन बेवक्त मुझे चिढ़ाते हैं..!!! बहुत तनहा हूँ, आओ ना..बेवक्त बाँध दो फिर से इस वक़्त की डोरी..!!"


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Wednesday, August 8, 2012

'जज़्बात..'

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"इक हसीं सौगात..
ज़ख्म बेहिसाब..

बिखरे जज़्बात..!!"

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Wednesday, August 1, 2012

'जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ..'



प्रिय दी, जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ..!!!

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"क्या पैगाम लिखूँ..
हर्फ़ सिमटे..
गुल बिखरे..
खुद..
पहलू में तेरे..
ए-राज़दां..
मुबारक हो..
आशियाँ इक..
खुशबू और मोहब्बत का..!!!"

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Wednesday, July 25, 2012

'महँगाई..'




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"कुछ मकां घर नहीं हो पाते..
कुछ रिश्ते शादाब नहीं हो पाते..

महँगाई ने चूल्हे की साँस तोड़ दी..!!"

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Wednesday, July 18, 2012

'विधि-विधान..'




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"आना-जाना खेल जीवन का..
विधि-विधान बदल सके न कोई..
सुख-दुःख:..लेखा-जोखा..
भोग करे फसल जितनी बोई..!!!"

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Tuesday, July 17, 2012

'बदनाम..'


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"मेरी इबादत का इंतज़ाम हुआ..
हर नफ्ज़..आज फिर बदनाम हुआ..!!"


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Thursday, July 12, 2012

'अजीब-सा चन्द्र..'





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"हथेली पर तुम्हारे..
अजीब-सा चन्द्र..
शीतलता की बजाय..
देह में मेरी..
भर देता है गर्माहट..

क्यूँ अक्सर..
ह्रदय की धमनी..
बदल देती है..
नियति..
और
पलायन होता है..
'नीच' से 'उच्च' की ओर..!!"

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Tuesday, July 10, 2012

'साँस की डोरी..'




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"मेरी दुखती रग पर हाथ आया..
जब तेरा..
साँस की डोरी..
फीके कर गयी रिश्ते सारे..!!!"


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Monday, July 9, 2012

'बेचैन रवानी..'




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"मायने बदले..
मियाद कम हुईं..
बेचारा दिल..
सह ना सका..
दीवारों में क़ैद रूह की..
बेचैन रवानी..!!"

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Saturday, July 7, 2012

'सूक्ष्म संकीर्ण..'




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"पश्चाताप गहराता जा रहा..
क्यूँ बंधन स्वीकार किया..
काश..
न झुका होता..
समाज की सूक्ष्म संकीर्ण दीवारों के आगे..!!"

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Friday, July 6, 2012

'मर्यादा..'

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"सुनो..
कल रात भी तुम पीकर आये थे..
उलटा-सीधा कहते रहे..
बहुत समझाया..
पर..
पर..
तुम कब समझते हो..
झूठ-सच करते-करते..
अब फरेब ना टिक सकेगा..

हर साँस की भी अपनी मर्यादा होती है..

जीवन की त्रासदी..
अंतर्मन का बिछोह..
बहुत सालता है..
जिसका अनुभव तुम कर पाओ...
ये संभव ही नहीं..!!!"

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Thursday, July 5, 2012

'टुकड़े..'




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"बीत जाता है..
सब कुछ..
समय के साथ..
शेष रहते हैं..
टुकड़े अनगिनत..
वियोग से सरोबार..!!"

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Tuesday, July 3, 2012

'गुरु-पूर्णिमा..'






गुरु-पूर्णिमा पर समस्त गुरुजनों का हार्दिक आभार एवं शत-शत नमन..!!

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"अर्पण उपलब्धि..
जीवन-श्रृंगार..
नमन गुरुवर..
असंख्य उपकार..!!"


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Sunday, June 24, 2012

'प्रेम-पत्र..'





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"प्रिये,
जाते-जाते इक बहुमूल्य उपहार रख जा रहा हूँ..
बिछौने के नज़दीक दराज़ में..
विगत वर्षों के..
स्नेह-मिलाप के रस से सरोबार..
माधुर्य की चादर ओढ़े..
प्रेम-पत्र..
देखो, तनिक भी सिलवट न आये..
सम्बन्ध-विच्छेद में..
अक्सर..
गुड़-सी मीठी स्मृतियाँ..
अंतर्मन की दीवारें खट्टी कर जाती हैं.!!!"


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Thursday, June 21, 2012

'तहखाने..'





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"गुल सज़ाने हैं कई..
अश्क मंज़ाने हैं कई..१..

फ़क़त..जुर्म हैं साँसों का..
एहसास रज़ाने हैं कई..२..

शोखी निस्बत मौसम..
मसरूफ़ियत के फ़साने हैं कई..३..

नज़रें बेज़ुबां..सिरहन बेनक़ाब..
अदा के खज़ाने हैं कई..४..

क़त्ल-ए-आम दरिया हुआ..
कुर्बानी के तहखाने हैं कई..५..

चिकने ग़म-ए-हिजरां..
रफ्ता-रफ्ता गलाने हैं कई..६..!!"

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Sunday, June 17, 2012

'बहुत अच्छा लगता है.. है ना..'





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"बहुत सुंदर हैं..
आँखें तुम्हारी..
हर पल मुझे ही निहारतीं हैं..
वो तुम्हारा मुझे चुपके-चुपके मुझे देखना..
आते-जाते बस इक नज़र भर देखना..
वो आँखों के इशारे..
मेरे मना करने के बाद भी..
मुझे यूँ ही परेशां करना(प्यार करना)..
बहुत अच्छा लगता है..
है ना..

वो आपके छोटे-छोटे से बाल..
जो मैं खींच भी नहीं पाती..
मेरे लिये गर्मी में भी लम्बे करने की कोशिश करना..
वो आपके बालों को बिगाड़ देना..
बहुत अच्छा लगता है..
है ना..

वो आपका खुद को आते-जाते आईने में निहारना..
कभी दायें-कभी बायें..
कभी आगे-पीछे..
वो ऊपर से नीचे देखना..
और जाँचते ही मेरी तरफ देना..
बहुत अच्छा लगता है..
है ना..

वो मेरी ख़ुशी के लिये..
'ग्रीन कलर' की टी-शर्ट पहनना..
धीरे-धीरे उसे पसंद करने लगना..
और अपने 'फेवरेट कपड़ों' में शामिल करना..
बहुत अच्छा लगता है..
है ना..

वो हर सुबह पूछना..
'दूध पीया..??'....'एक ग्लास और पीयो..'..
वो दोपहर को खुद दो चम्मच होर्लिक्स वाला दूध लाना..
और कहना, 'चलो, जल्दी पीयो..!!'..'और लाऊं क्या..??'
बहुत अच्छा लगता है..
है ना..

वो मेरे लिये हर जगह..
बिना आलू-प्याज वाला खाना ढूँढना..
रेस्त्रो में मेरे साथ वो ही खाना..
जो मुझे पसंद हो..
बहुत अच्छा लगता है..
है ना..

वो खाने की मेज़ पर..
मेरा आपके पैरों को धीरे से गुदगुदाना..
और आपका चुपके से मुस्कुराना..
मेरी ताल से ताल मिलाना..
बहुत अच्छा लगता है..
है ना..

वो आपका और मेरा साथ..
आपका मुझे पकड़ आईने के सामने लाना..
फिर खड़े हो दोनों को निहारना..
और कहना..
'ऐसे अच्छे लगते हैं ना हम..?????'
बहुत अच्छा लगता है..
है ना..

तेरा-मेरा संसार..
जीवन का आधार..
प्यारा-सा उपहार..
बहुत अच्छा लगता है..
है ना..!!!"


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Friday, June 15, 2012

'गेंदे के फूल..'




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"एक दिन जब मैंने कहा था..
मेरे दिल को इंस्टाल करना है आपके ह्रदय-पटल पर..
आपने कहा था..
'प्यार के दायरे में आयेंगे दिल तो अपने आप ही sync हो जायेंगे'..
आज सोचती हूँ..
क्यूँ आपका और मेरा समय मैच नहीं करता..
क्यूँ आपके अंतर्मन में गेंदे के फूल की तरह नहीं बस पा रही..!!"

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Wednesday, June 13, 2012

'मियाद..'





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"पुराने दर्द अब पुराने हो चले..
हर ग़म की मियाद तय होती है..
है ना..!!!"


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