"गोलार्ध से बहता अथाह समंदर मेरे महासागर को नयी दिशा दे रहा है.. आओ, थाम लो मेरा समर्पित जीवन और संचालित होने दो जीवन-प्रणाली..!!! जानती हूँ..कि तुम ही जानते हो मेरी व्यथा..!!"
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--अनुभूति का वरदान..रख लो मान..
1 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:
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खुबसूरत अभिवयक्ति....
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