"अरमानों की सेज पर.. सिलवटें समेटती.. शब.. वस्ल की चाहत.. और.. जिंदगानी का कहर.. बाँध रखना.. उस संदूक के कोने में.. मासूम मोहब्बत.. यादों के पल.. और.. नमकीन गुड़ से लबालब.. कश्ती.. जो ना बह सकी.. इस तूफानी बरसात में.. फ़क़त..!!!"
"सीमा का उलंघन हुआ है.. जब-जब.. बही है.. एक नयी धारा.. मिला है.. एक नया धरातल.. ना समझ सकोगे.. कभी.. ह्रदय की अनुभूति.. दर्पण की परछाई.. और.. ओस के कोमल अश्रु..!"