Thursday, November 21, 2013

'तुम..मैं..'





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"खुशबू..
सुगंध..

याद..
स्मृति..

जज़्बात..
भावना..

नक़्श..
चिन्ह..

तुम..
मैं..

क्षितिज..
उफ़्क..

नशा..
ख़ुमार..

प्रिय..
जां..

आत्मा..
रूह..

मैं..
तुम..!!"

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--इत्र..बाँहें..आलिंगन..पाक..नफ़्स..बख्त़..

Sunday, November 17, 2013

'समर्पण की खुशहाली..'





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"जीवन की परिभाषा ऐसी..
किसने बनायी है..
क्यूँ बेटी अपने घर से ही..
हुई परायी है..

काश! समझते जो बनाते..
ताने-वाने..
जीवन में समर्पण की खुशहाली..
एक वो ही लायी है..!!"

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'भारत-माँ..'




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"सर जी..आप सदैव सत्य लिखते हैं..
देश की राजनीतिक बीमारी पर तीर कसते हैं..

आज मुझे..ज़रा ये भी तो बताइए..
कितने यहाँ आपकी-मेरी बात सुनते हैं..

क्यूँ उनको असर होता नहीं..
शहीद उनका कोई होता नहीं..

क्या फितरत हो चली राष्ट्र-नेताओं की..
बिन पैसे कुछ होता नहीं..

आखिर कब तक ये किस्सा चलेगा..
आखिर कब तक इन्साफ बिकेगा..

न कल कुछ हुआ है..ना आगे कुछ होगा..
६६ वर्ष बाद भी असह्य-सा देश-ह्रदय होगा..

चीरते हैं अपने ही कुछ पाक-पुजारी..
कितनी रातें सैनिकों ने जागे गुजारीं..

कौन लिखेगा ऐसी क़ुरबानी..
बाकी कहाँ खून में रवानी..

शर्मिंदा हूँ..न रख सका भारत-माँ की लाज..
ए-माँ..गुनाह मेरा भी है..न करना मुझे माफ़..!!"

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'नाराज़ हूँ आपसे..'






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"जाइये..नाराज़ हूँ आपसे..नहीं करनी कोई बात..!! मेरे किसी सवाल का जवाब नहीं देते..अब, जब तक आप हर सवाल का जवाब विस्तार से नहीं देंगे..मुझे कोई और बात नहीं सुननी..!!!!

वैसे भी, २ दिन बाद तो अगले १० दिन तक नहीं नहीं मिलेंगे मेरे निशां.. शायद, बढ़ भी जाए समय की ये अल्प-अवधि..!!

"जानते थे हम..
न होगी सुनवाई..
जाने क्यूँ फिर..
आस लगाईं..!!"

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--रूह सैडी-सैडी..

'माँ का लाल..'






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"जाने कितने असंतुष्ट हुए..
जाने कितने शत्रु होंगे..
सोचूँ गर सबके लिए..
पूरे न कभी स्वप्न होंगे..

इसीलिए बढ़ता गया..
थकता गया..चलता गया..
न शब्द थे..न कोई सहाय..
अपना विकास करता गया..

अधिकार मेरा है और रहेगा..
कर लेना तुम सारे जतन..
अपनी माँ का लाल हूँ..
मिट आया मैं अपने वतन..!!!"

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Tuesday, October 29, 2013

'गिरफ़्त..'








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"तेरे दिल में बसता हूँ..जानम..
तेरी हर साँस में सुन शोर मेरा..
करने दो एक बार फिर..
इक कोशिश नाकाम-सी..
क्या बांधेगा रवायतों का टोला..
तेरी गिरफ़्त में क़ैद..
मेरी हर आज़ादी है..!!"

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'प्रार्थना..'





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"हर पल ख़ुदको नम रखना..
पास न कोई गम रखना..
जानते हैं वो अंतर्मन की बातें..
प्रार्थना में अपनी दम रखना..!!"

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Sunday, October 27, 2013

'आठ..'





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"जां..आज कितने दिनों बाद 'आठ' बजे हैं.. जैसे वक़्त रुक गया था न इस दरमियां, जब थी दुनिया दरमियां..!!

चलो, आज शब न आने दें किसी को दरमियां.. वक़्त नापे ख़ुद वक़्त को..और..वक़्त ही ना हो दरमियां..!!"

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--थॉट एट 'एट'..

Friday, October 18, 2013

'वीकैंड मेनिया..'





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"क्या तुमने सुनी हैं मेरी धड़कनें कभी..
सुलगे हो अंगारों की सेज पे कभी..
दहाड़े मार-मार रोये हो कभी..
रात भर ख़त लिखते-मिटाते रहे हो कभी..

नहीं न..

फिर तुम समझ नहीं सकते..

मेरी रूह की गहराई..
मेरी इबादत का जुनूं..
मेरे जिस्म के निशां..
मेरे पोरों की गर्माहट..

जाओ..

और भी हैं..
महफ़िल में तुम्हारे..

इक हम नहीं..
तो गम नहीं..!!"

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--वीकैंड मेनिया..

Wednesday, October 16, 2013

'स्याह जज़्बात..'





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"सफ़र की पहली मंजिल..
हमसफ़र की दूसरी दहलीज़..
दरख्त की तीसरी रहगुज़र..
कागज़ की चौथी निशानी..

सुर्ख़ सैलाब सिमट जायेंगे..!!"


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--स्याह जज़्बात..रूह की सबसे नीचे वाली बैंच पर..

'प्रेम के अर्थ..'






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"क्या प्रेम में मिलना ही सब कुछ है..?? इसकी अनुभूति स्वयं में इतनी प्रबल है कि किसी और व्यक्ति या वस्तु विशेष का कोई स्थान शेष ही नहीं रहता..कोई रिक्तता का प्रश्न ही नहीं..!!! जाने क्यूँ..कुछ जन इस 'प्रेम' के इतने अर्थ कहाँ से ले आते हैं..??

वैसे भी, जीवन में पाना ही सब कुछ नहीं होता.. भोजन के स्वाद का सही माप तो दूसरे को चखा कर ही ज्ञात होता है.. है ना..??"

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--सिली पीपल..

Wednesday, October 9, 2013

'जिस्मों की रीलें..'







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"इस रूह से उठा..
उस रूह चला..
फ़ासले पाटता कैसा गिला..
जो तुम नहीं कोई ख्वाइश कहाँ..
मैं दीवाना..आवारा..
दश्तो-सहरा बिखरता रहा..
चल उठायें तम्बू की कीलें..
जाने कबसे पुकारती जिस्मों की रीलें..!!"

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Sunday, October 6, 2013

'कभी..'








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"खलती है कमी इक तेरी..
रूह पूछती है सवाल कई..
किसका जवाब दूँ..
किससे राह पूछूँ..
कौन आयेगा यहाँ कभी..

मर्ज़ी इक तेरी..
दहशतगर्दी इक मेरी..
साँस की डोरी..
कच्ची रही..
यूँ ही..
क्या समझेगा कोई कभी..!!"

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Saturday, September 28, 2013

'तोहफा..'








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"सुनो जानां..

मेरा बर्थडे आने वाला है..तुम्हें याद है न..??? इस बार मैं तोहफा देना चाहती हूँ..इक ऐसा तोहफा जो तुम अपनी रूह में..हर पल खिलता-पनपता पाओगे..सजाओगे जब भी ख़ुद को आईने के सामने..नज़रें मेरी ख़ुद पर ही पाओगे.. छुओगे जब कभी दरिया को..छुअन मेरी ही पाओगे.. सहलाओगे जब कभी सिर..मुझे ही अपनी गोदी में पाओगे.. बाँधोगे कलाई पर जब कभी वो घड़ी..वक़्त मेरा ही पाओगे.. निभाओगे रिश्ते जब कभी..हर शख्स में इक मुझे ही पाओगे..!!!


इंतज़ार करेंगे हम-तुम उस शब का..जब से गिरफ़्त में ख़ुद को कसा पाओगे..!!! जानती हूँ, तुम चाहते हो..मैं भर लूँ तुम्हें बाँहों में और बहते रहें बरसों-से क़ैद अश्क सारे..!!"

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---बर्थडे मंथ बस आने को है..

Tuesday, September 24, 2013

'मेरे रंगरेज़..'





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"जा रंग ले..
खूं से रूह के लिबास अपने..

यूँ भी मैं शामिल रहूँगा..
हर अल्फ़ाज़ में तेरे..

बहुत गहरे हैं..
चाहत के घेरे..
ना टूटेंगे..
ये चंद फेरे..

जा..मेरे रंगरेज़..
रंग ले..

मेरे जिस्म से..
वफ़ा के माने..
ना मिलेंगे..
कोई हमसे बेगाने..!!"

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Monday, September 9, 2013

'क्षमा-याचना..'

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"पर्वाधिराज पर्युषण जी के आगमन पर मन सदैव उल्लासित रहता है..अनंत-काल से एकत्रित अष्ट-कर्मों को क्षय करने का सु-अवसर मिलता है..!!! और समापन पर एक विशेष उपहार--'संवात्सरिक प्रतिकमण' करके समस्त प्राणी-मात्र से क्षमा माँगने का दुर्लभ संयोग, जो अन्य दिवसों में संभव नहीं..

चौरासी लाख जीव-योनियों से हाथ जोड़कर मन-वचन-काया द्वारा हुई अनगिनत त्रुटियों के लिए क्षमा-याचना करते हैं..खमत-खामना..!!!"

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Saturday, August 31, 2013

'परवाह..'

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"अब परवाह..
ना करना..
जीना सीख..
रही हूँ..
तुम बिन..

यूँ भी..
हर पल..
बोझ हूँ..
तुम्हारे लिए..

हसरत..वक़्त..
ज़ाया करती..
जाने कितने..
फ़ोन करती..

ना होगी..
कोई रुसवाई..
खुदपर अब..
लगाम लगाई..

ना करुँगी..
अब परेशान..
रखना तुम..
अपना ध्यान..!!"

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--जाने कहाँ से ये हर्फ़ आ गए..

Wednesday, August 28, 2013

'मंजिल..'






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"कभी-कभी बहुत लम्बी हो जातीं हैं राहें..मंजिल बारहां रूह से टंगी रहती है..!!"

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--काश तुम समझते उलझनों की उलझन..

Saturday, August 24, 2013

'असंख्य पत्ते..'





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"कैसे टूटे हैं शाख पे बैठे असंख्य पत्ते..चिपके हैं तने से फिर भी उधड़े हैं..!!!"

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--हक़ीक़त-ए-ज़िन्दगी..बेयर ट्रुथ..


Friday, August 16, 2013

'ज़ालिम नैटवर्क..'






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"तलाशती रही..
यहाँ-वहाँ..
इधर-उधर..
ऊपर-नीचे..
तुम कहीं न मिले..

SMS कर पूछा..
'कहाँ-कहाँ ढूँढा आपको..'

जवाब कुछ यूँ आया..
'अपने दिल में नहीं देखा होगा..'

निगाहें जाने क्यूँ मुसकायीं..
मानो बांछें खिल आयीं..

लिख भेजा हमने भी..
'हाँ, वहाँ ही अक्सर भूल जाती हूँ..'

उड़ता-उड़ता जवाब आया..
'Careless Fellow .. :P '

हम भी थोड़ा इठलाये..
'अच्छा जी..(ढेर सारे ;-) :P smileys लगाये)'

बैठे हैं अब तलक इंतज़ार में..
ज़ालिम नैटवर्क..हाय कितना सताये..!!"

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Thursday, August 15, 2013

'ए-जां..'





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"मेरी आज़ादी का जश्न तेरी गिरफ्त में है..ए-जां..!!"

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Tuesday, August 13, 2013

'सरसराहट..'



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"लौटा सकोगे..

करवट की सिलवट..
सिमटती आहें और बाँहें..
गर्माहट और सरसराहट..
तपती रूह..सुलगते जिस्म..

इंतज़ार करुँगी..

शबाब के जवाब का..
अलाव के बहाव का..
कंबल के संबल का..!!
प्यार के अधिकार का..!!"

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--दफ़अतन चली पुरवाई..फैली हर ओर तन्हाई..

'जवाब..'



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"लिखने की उम्र गुज़रती है क्या..?? बहुत सोचा..इस ताल के राग के बारे में.. कैसा सवाल उठा आज..??? सब परेशां हुए जा रहे हैं..गली-गली ढूँढ रहा जवाब..!!!"


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--बारिश के दुष्प्रभाव..

'दरकार..'



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"दहलीज़ थी इक..
दरमियां सफ़र बेशुमार..
सिमटी रही फ़क़त..
ज़िन्दगी की दरकार..!!"

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Monday, August 5, 2013

'रंगों की टोली..'



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"ज़िन्दगी की शान में गुस्ताख़ी हो जब कभी..
थाम लेना आके तुम वहीँ..
मुश्किलें सैलाब से लबरेज़ आएँगी बहुत..
गिरफ्त कस देना तुम वहीँ..
ज़ालिम होंगी रवायतें और स्याह उजाले..
जड़ देना छल्ले तुम वहीँ..
छाई हो वीरानी और फीकी रंगों की टोली..
मल देना चाहत तुम वहीँ..
मांगती हों मौहलत आंसुओं की बेनूरी..
चिपका देना नक्श वहीँ..
बरबाद हो आशियाना और नसीब बे-लिबास..
पिघला देना लज्ज़त वहीँ..!!"

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