Sunday, September 11, 2011

'दो पल की ज़िन्दगानी..'





...


"दो पल की ज़िन्दगानी कैसी..
भीगती हुई बारिश..
तन्हा बूँद जैसी..
उछलती कूदती..
झनझनाती मचलती..
फ़क़त..
अपने कूचे पे बेगानी..!!"

...

10 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

sushma verma said...

बारिश और आपकी खुबसूरत पंक्तिया दोनों ही मन को भीगो गयी....

सागर said...

bhaut hi khubsurat....

shephali said...

बारिश बेगानी क्यों है
वो तो प्रिय सखी जैसी होती है

Unknown said...

बारिश से ..नाता ..मूड के हिसाब से बदलता रहता है

Unknown said...

धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!

Unknown said...

धन्यवाद सागर जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद शेफाली जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद दी..!!

Udan Tashtari said...

भीगा गई..

Unknown said...

धन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!