
...
"क्या ढूँढ रही है मेरी नज़र..
क्या चाहती है रूह मेरी..
क्यूँ धुंधली है हर राह..
क्यूँ प्यासा लगता है हर दरिया..
क्यूँ तड़प इतनी है..
क्यूँ ये तलब मिटती नहीं..
क्यूँ अश्क थमते नहीं..
क्यूँ अब्र-ए-चश्म जलते नहीं..
बस भी करो..
थक गयी हूँ..
अब..!!"
...
0 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:
Post a Comment