Saturday, October 6, 2012

'लम्हे..'


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"सफ़र में मिले कुछ अजनबी..
चंद लम्हे देकर..
सौदा-ए-रूह किया..!!!"


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Thursday, October 4, 2012

'बेचैनी की चादर..'




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"बेचैनी की चादर ओढ़ी कल रात..
याद तेरी रची-बसी सूत-सी कोमल..!!"


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'बेजान रातें..'





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"ये चाहत से तरबतर यादें..
बन जुगनू..
झिलमिलाती रहीं..
मेरी बेजान रातें..!!"

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Sunday, September 30, 2012

'किश्तें..'




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"जिस्म के रिश्ते..
नासूर दे जाते हैं..
अक्सर..

बेवज़ह मरहम..
लगा जाते हैं..
अक्सर..

ज़रा..
गम-ए-जुदाई..
उधार दे जाना..

किश्तें चुकानी हैं..!"

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Thursday, September 27, 2012

'फरेबी व्यापार..'




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"क्या ह्रदय बिलखता नहीं..
स्वयं पर अत्याचार से..

क्या लहू खौलता नहीं..
क्षण-क्षण के संहार से..

क्या स्मृति क्षीण होती नहीं..
नृशंस व्यवहार से..

क्या अंतरात्मा चोटिल होती नहीं..
जघन्य प्रचार से..

कहो, कब मिलेगा विराम..
फरेबी व्यापार से..!!"

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Wednesday, September 26, 2012

'कुकर की सीटी..'





कृपया बात करते समय अपने kitchen में जाकर पहले बर्नर को ऑफ कर दें..आप सुन रहे हैं ना..???

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"उफ़..
कितनी बेवफ़ा..
ये कुकर की सीटी..

कितने गिरते-संभलते..
जी-भर कोशिश करते..
लफ्ज़..
आते हैं ज़ुबां..
जब कभी..

धमम...म..म..
बज जाती है..
सीटी-ए-हिज्र .!!

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'टोकरी रंगों-वाली..'


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"इन खाली चौकौरों में भर दो अपनी लाली..
विरक्त लगे जब कभी मेरी जीवन-डाली..
निकाल फेंकना मुझपर टोकरी रंगों-वाली..
सहज स्वीकारुंगी स्नेही-विशिष्टता निराली..!!!"

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Monday, September 24, 2012

'तुम्हारा प्यार..'




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"तुम्हारा प्यार..
एकदम जिद्दी..
बिलकुल मुसलाधार बारिश जैसा..
कितना ही बचने की कोशिश करो..
भिगो जाता है..
रूह की सतह तक..!!"

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'वजूद-ए-लहर..'



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"काश..
बँध सकते..
रेत पे साहिल के घरोंदे..

पड़ता है टूटना..
हर पल..

फ़क़त..
बचाने..
वजूद-ए-लहर..!!"

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Saturday, September 22, 2012

'नसीब..'

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"यूँ लगता है..
खो गयी..
एक बार फिर..

टूट गयी..
बन सितारा..
एक बार फिर..

दुआ ये ही अता हुई हो..
शायद..
नसीब मेरे..!!"

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Friday, September 21, 2012

'आकाश ..'

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"विषम परिस्थिति क्या गिरायेगी मनोबल मेरा..
रख दूँ कदम हौसला-भर, वो ही आकाश मेरा..!!"


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Wednesday, September 19, 2012

'अवशेष..'





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"शब्द सूक्ष्म-भाव क्या जानें..
कोमल कोशिकाओं की मानें..
ह्रदय-पट्ट खोल ठाने..
प्रवेश तुम्हारा पाने..
क्षेत्रफल गोलार्ध छाने..
चले रंगमंच लाने..
पहुँचे भाव जगाने..
जीवन-प्रवेश रमाने..
आओ, अवशेष थमाने..!!"

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'दिल..'




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"मुड़ जाते हैं..
रास्ते सारे..
खुद-ब-खुद..
तेरी ओर..
गर्द हो भारी..
या तूफ़ानी चिंगारी..
लकीरों पे काबीज़..
राज़दां, मैं दिल हारी..!!"

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Tuesday, September 18, 2012

'बारिश..'




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"भीग जाने दो..
बारिश की बूंदों को..
ज़रा..
जन्मों से बोझिल साँसें..
भरती नहीं दम ज़रा..!!"

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'तनहा..'




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"ग़मज़दा..
गुमशुदा..

तनहा..!!!"

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Thursday, September 13, 2012

'तुम..'


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"लकीरें - कुछ गहरी, कुछ हल्की..
गिरफ्त - कुछ मज़बूत, कुछ कमज़ोर..
जज़्बात - कुछ उत्तेजित, कुछ भावुक..

तुम - कुछ साँसें, कुछ मैं..

मैं - कुछ तुम, कुछ तुम, कुछ तुम, सब कुछ तुम....!!!"

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Wednesday, September 12, 2012

'ए-पथिक..'




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"सूर्य-किरण से बहता..
अनंत प्रताप..
झर-झर झरो..
बलशाली अनुताप..


उठो..ए-पथिक..
त्यागो विकार..
पग-पग परिश्रम..
जीवन-आधार..!!

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Monday, September 3, 2012

'दरमियां..'




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"रेज़ा-रेज़ा बहता दर्द..
नफ्ज़-नफ्ज़ दहकता अश्क..

काश..फ़ासला गहराता नहीं..
वफ़ा, रज़ा, ख़ता, सज़ा दरमियां..!!"

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Friday, August 31, 2012

'चुपके-चुपके..'






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"हर लम्हा आँख नम कर जाते हो..
हर ख्वाब सज़ा कम कर जाते हो..१

पशेमां मौसम हुए जाते हैं..अब..
क्यूँ..तन्हाई में दम भर जाते हो..२

नूर से रंगी तस्वीर वो पुरानी..
फ़क़त..सांसों में जम* भर जाते हो..३

दर्द मचलता है चुपके-चुपके..
खामोशी से मुझमें रम जाते हो..४..

रिवायत-ए-मोहब्बत-ए-आलम..
दो गैरों को हम-दम कर जाते हो..५..!"


* जम = जाम..

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'तमन्ना-ए-फिरदौस..'




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"ज़मीर जो बिछड़ा रूह से..हुआ मलाल है..
ज़िन्दगी की कशमकश पर..उठे सवाल है..१

शिकार हुए नफरत में..गुलिस्तान कितने..
ख्वाबों की ज़मीं पर छाया..फिर अकाल है..२

सैलाब था जो दरमियान..रंगों से भरा..
सिमट गया..शायद..वहशत का कमाल है..३

कश्तियों में डूबा..बेजार आसमान-ए-चिराग..
तमन्ना-ए-फिरदौस..वाह..क्या ख्याल है..४..!"

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'कुछ ख्वाब..'





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"हर पल..सपना-सा था..
रूह में बसा..अपना-सा था..

कारवाँ इक..चलता रहा..
एहसास इक..पलता रहा..

रंज-ओ-गम..जमता रहा..
एह-दे-वफ़ा..रमता रहा..

अहमियत फिसलती रही..
बेबसी मचलती रही..

अँधेरा चमकता रहा..
रकीब दमकता रहा..

सिलवटें उलझी रहीं..
रिवायतें झुलसी रहीं..

लम्हे जलते रहे..
पैमाने मलते रहे..


कुछ ख्वाब..

गुड-से तीखे..
नासूर बंजारे-से..!"

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'खामोश कदम..'





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"अरसा हुआ..शब नहीं देखी..
साँसों ने हकीकत नहीं देखी..१

बेजुबान ही रहे..फरेबी अरमां..
वाईज ने मल्कियत नहीं देखी..२

अनजान मंजिल..खामोश कदम..
खंज़र ने शोखियत नहीं देखी..३

माहताब-सा हुनर कहाँ रकीब..
मुद्दतों से नसीहत नहीं देखी..४..!"

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'हार गयी मैं..'





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"आपको मैने अपना 'बच्चा' ही माना था..हर पल..
आपके सपनों को सच करने के लिए साथ देना चाहा..
थोड़ी मदद भी करी..

शायद..हार गयी मैं..


जितना दुलार..स्नेह..
मन के किसी कोने में दबा हुआ था..
स्वयं ही फूट एक धारा फूट पड़ी..

आपने कभी कहा क्यूँ नहीं..
यह दुलार..प्यार..अपनापन..स्नेह..सम्मान..पर्याप्त नहीं था..

मैं प्रयत्न करती..
सुधारने का हर संभव प्रयास करती..

इन आँखों से बहती हुई अश्रु-धारा..
न जाने किधर जा रही है..

शायद..उस राह पर जहाँ स्वयं से..
कुछ अनकहे प्रश्न रखे हैं..

हर किताब में समाए हुए..
उन अनगिनत शब्दों का सार यही है..


आज..हार गयी मैं..


उस माधुर्य को एकत्र कर..
मोतियों जैसा उज्ज्वल..
निर्मल..
ना रख पाई..

उन स्मृतियों को अंतर्मन में..
समावेष्ट ना कर पाई..


आज..हार गयी मैं.. ..


उन कमल के फूलों की पंखुड़ियों के समान..
आपके आँगन को सुशोभित नहीं कर पाई..

उस गगन में व्याप्त उपलब्धियों को..
आपके शौर्य अनुसार संजों नहीं पाई..


आज..हार गयी मैं..


उस चंचल..मुस्कान को..
काजल जैसा तेज नहीं दे पाई..

उस प्रचंड स्फूर्ति को..
इक दिशा भी ना दे पाई..


सच ही तो है..
आज..हार गयी मैं..


उस नदी में सिमटे हुए तत्वों को..
अनुचित स्थान ना दे पायी..

उस अदभुत बेला में नहाये हुए..
रंगों को अभिमंत्रित नहीं कर पाई ..


आज..हार गयी मैं..


उस जीवन की प्रक्रिया को..
सुन्दरता नहीं दे पायी..

उन पक्षियों की सुगबुहाटों को..
सरगम का स्वर ना दे पाई..


आज..हार गयी मैं..


उन पर्वतों की विशाल श्रृंखला को..
नमन भी ना कर पायी..

उस आम के वृक्ष की छाँव में..
खिलखिलाती जाड़े की धूप को..
अपना ना कर पायी..

आज..हार गयी मैं..



जड़-हीन हो गयी हूँ..मैं..
कोई चेतना नहीं रही..

स्वयं से घृणा भी हुई..
निर्माण ना हो सका..एक भविष्य का..
जहाँ कोई शंका..कुरीतियाँ ना हों..



सच..

आज..

हार ही गयी मैं.. !"


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'कीमत-ए-जुदाई..'




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"बेबसी..तन्हाई..जफा..
थोड़ी महंगी हुई...वफ़ा..१

पलटा नहीं साया..कभी..
था दूर..जो हर दफा..२

रंजिश पाबंद..रूह काफिर..
माज़ी हर नफ्ज़..खफा..३

फलसफा-ए-ज़िन्दगी..
कीमत-ए-जुदाई..नफ़ा..४..!!"

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'मेरी गुड़िया रानी..'





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"सिमटी-सी..सहमी-सी..
मेरी गुड़िया रानी..

जब-जब सहलाऊं..
आ जाए रवानी..

खिलखिलाती हुई भरे..
जीवन में कहानी..

मेरी प्यारी बिटिया..
हुई अब सयानी..

नयी राहें बुलाएं..
खोजो दिशायें आसमानी..

बढ़ते रहो तुम..
बनेगी इक निशानी..!"

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