Thursday, December 29, 2011

'मासूम सितारे..'





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"फलक पर टिके हैं..
मासूम सितारे..
जो कहो.. हमनवां..
थोड़ी 'Snowfall' करा दें..!"


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Wednesday, December 28, 2011

'वादा..'




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"ख्वाइश थी..
ना गुलज़ार हो..
आँगन कभी..

वादा निभा आया हूँ..
आज फिर..
खुद को बेच आया हूँ..!!!


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'जाड़े की धूप..'




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"जाड़े की धूप में..
यूँ तेरा आना..
मेरे पास बैठ..
आरज़ू जगाना..
जिस्म से हो..
रूह में समा जाना..
जां मेरे..हर पल..
यूँ ही दिल से लगाना..!!"

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Thursday, December 22, 2011

'हकीकत-ए-शबाब..'




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"चमकते जिस्म..
बहकते ख्वाब..

हकीकत-ए-शबाब..!!!"

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Wednesday, December 21, 2011

'दहलीज़-ए-फ़िरदौस..'



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"क्यूँ परवाह किये जाते हो..
मेरी तन्हाई को बर्बाद किये जाते हो..

ना आया करो..हो पाबन्द..
रूह की परतें क्यूँ खोले जाते हो..

कर कुछ करम..ए-हमनवां..
ना आये ख्वाइश ज़ुबान पे..

दहलीज़-ए-फ़िरदौस मुमकिन कहाँ..
ख्वाब-ए-आशियाना सजाए जाते हो..!!"


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Tuesday, December 20, 2011

'फ़रेबी नज़ारे..'





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"फ़ासले दरमियां मिटते नहीं..
अक्स आईने से ढलते नहीं..

क्या कशिश है..निगाहों में..
क्या खलिश है..अदाओं में..

निशां जिस्मों पर संवरते नहीं..

क्या नशा है..
उफ़..फ़रेबी नज़ारे..
दामन से उतरते नहीं..!!"


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Sunday, December 11, 2011

'गुलाबी धूप..'





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"जाड़े की गुलाबी धूप..
तुम्हारी यादें..
नम आँखें..
बारहां..
छुपा रखता हूँ..
हर मज़लिस..!!"

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Thursday, December 8, 2011

'बही-खाते..'



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"हर बात भूल जाया करो..
सुनो ना..
मेरे महबूब..

जाने दो ना..
ये बही-खाते..

अज़ीज़ हैं बहुत..मुझे..
दिल के ये ज़बरन कब्जे..!!!"

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Tuesday, December 6, 2011

'ज़र्रा-ज़र्रा..'



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"ज़र्रा-ज़र्रा बिक रहा था ईमां..
रेज़ा-रेज़ा लूटा रहा था वफ़ा..

अजीब है..दास्तान-ए-गलियारे-ए-सियासत..!!!"

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Monday, December 5, 2011

'बज़्म..'





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"बज़्म में उनकी लूटा आया..
कारवां-ए-अश्क़..
३३ % एक्स्ट्रा ऑफर याद आया था..
फ़क़त..!!!"


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Friday, December 2, 2011

'रूह मेरी..'




दी..आपके लिए..


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"कुछ ना कहूँगी..
फिर भी..
समझ जायेंगे..
आप..
हैं ना..

हर आहट..
पहचान जाते हैं..

हर धड़कन..
सुन लेते हैं..

हर आँसू..
देख लेते हैं..

आप से ही रौशन..
रूह मेरी..

आपसे ही शादाब..
जिंदगानी मेरी..

यूँ ही रहिएगा..
मुझमें शामिल..!!!"


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'जुस्तजू..'




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"आ..
मेरे शौक से जुस्तजू करले..

जो ना है मेरा..
भर दूंगा दामन में तेरे..

इक बार..
फ़क़त..
इक बार..
मुझे रूह में भर ले.!!!".


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'सफ़ेद उदासी..'








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"देखता हूँ..
मुड़कर पुरानी राहें..

नज़र आते हैं..
कुछ बिखरे लफ्ज़..
कुछ खुरदुरे एहसास..
और..
एक सफ़ेद उदासी..

सच..
आसां नहीं..
झूठे नक़ाबी घरोंदों का सफ़र..!!"


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Thursday, December 1, 2011

'हसरतें..'




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"जा रहीं हूँ..
निभा रिवायतें सारी..
शबों में ज़िंदा..
हसरतें रखना..!!"

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Monday, November 28, 2011

'मायावी आडम्बर..'





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"बहुत शोषण हुआ..
अंतर्मन चीर-हरण हुआ..

रात्री के पहले पहर..
सामाजिक परिवेश में..
कितने स्वप्नों का काल हुआ..

मुखौटे पहन दंभ दिखाते..
संबंधो के ठेकेदार..
कोमल पुष्पों का त्रास हुआ..

कितना विचित्र..
मायावी आडम्बर..!"


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Saturday, November 26, 2011

'रूह के छाले.. '



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"खफ़ा हूँ..
खुद से..

आ जला दे..
रूह के छाले..

बुझते नहीं..
जिस्मों के ताले..

क्या मुमकिन है..
अरमानों के पाले..!!!!"

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'बेच आया हूँ..'




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"ख्वाइश थी..
ना गुलज़ार हो..
आँगन कभी..

वादा निभा आया हूँ..
आज फिर..
खुद को बेच आया हूँ..!!!


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Saturday, November 19, 2011

'सच..'

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"झूठी रिवायतें..
फ़रेबी चाहतें..
यूँ भी..
सच बिकता कहाँ..!!!"

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Friday, November 18, 2011

'ये रतजगे..'





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"ये रतजगे..
ये जन्मदिन के तोहफे..
होते कारवां शुरू तुमसे..
ये जिस्मों के रेले..

बेइन्तिहाँ मोहब्बत तुमसे..
बेशुमार सुर्ख बोसे..

सुनो जां..
करते हो ना..
तुम भी..
मेरे जैसे..
हर शब का इंतज़ार..!!!!"


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Wednesday, November 16, 2011

'तमगा-ए-गद्दार..'



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"क्यूँ जिस्मों के रेले..
रूह के मेले हो जाते हैं...

निभा ना सको..
गर..
चाहतों के रिश्ते..
क्यूँ बेगाने..
इलज़ाम लगा जाते हैं..

क्यूँ ख्वाइशों को..
झूठे नकाब पहनाते हैं..
तोड़ के दिल..
तमगा-ए-गद्दार सज़ा जाते हैं...!!!!!"

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Friday, November 11, 2011

'निर्मल स्याही..'






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"लिखती है कलम..
जब कभी..
ह्रदय के ताल..

चख लेते हैं..
सुमन की गर्मी..
और..
प्रश्नों की नरमी..

झुरमुट प्रकाश में..
निर्मल स्याही से..
मिलना गले..
किसी दिन..

दर्शनाभिलाषी --

कुछ तरबतर अश्रु..
कुछ अपरिचित स्मृतियाँ..
और..
कुछ बूँदें..
निर्मोही तेल की..!!!"

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Wednesday, November 9, 2011

'चाहत मेरी..'



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"माँगता रहा..
ता-उम्र..
चाहत मेरी..
ना भर दामन उसका..
आज फिर गिरा आया हूँ..
हाँ..
आज फिर..
अपना ईमां..!!"


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Tuesday, November 8, 2011

'हिसाब लगायें..'




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"बर्बादी का सबब..
साथ लाया हूँ..
जिस्मों को तौलने..
रूह का काँटा लाया हूँ..

तुम्हारा आसमां थोड़ा फीका है..
मेरी ज़मीं थोड़ी गमगीं है..

आओ..
ज़रा बैठ हिसाब लगायें..

क्या खोया..
क्या पाया..

कुछ कदीम जज़्बात..
कुछ सुलगते अरमान..

और..
कुछ तेज़ कदम..
मेरी रूह-से-तुम्हारी रूह तक..!!!"


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Sunday, November 6, 2011

'नज़र-ए-महताब..'


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"गुज़रतीं हैं साँसें..
यादों के गलियारे से..
जब कभी..

वफ़ा के साये..
झाँकते हुये..
छू जाते हैं..
अफ़साने कई..

वक़्त के पहिये..
लगाते हैं..
यकीं के तम्बू..

इठलाती पुरवाई..
लूटाती है..
साज़ कई..

ना सज़ा मिले..
मोहब्बत की कभी..


कुछ अल्फ़ाज़ यूँ भी..
नज़र-ए-महताब..
कूचा-ए-यार..!!"


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Tuesday, October 25, 2011

'खलिश-ए-आगोश..'


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"अजीब दास्ताँ..
जिस्म अपना..
ना रूह से वास्ता..
बहते रहे..
शब भर..
ना हासिल..
फ़क़त..
आशियान-ए-खानाबदोश..!!!"


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