Tuesday, January 25, 2011

'रेज़ा-रेज़ा..'



...


"बिखरे थे हर ओर..
तन्हाई के रेले..
वफ़ा से लबरेज़ था..
मेरा दामन..
नस्तर सुलगे..
चले..
हसरतों पे खंज़र..
ताल्लुख तमन्ना से..
हुआ इस कदर..
वजूद बिका..
रेज़ा-रेज़ा..!!"

...

2 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

संजय भास्कर said...

वाह ! बेहद खूबसूरती से कोमल भावनाओं को संजोया इस प्रस्तुति में आपने ...

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय भास्कर जी..!!