Tuesday, October 11, 2011

'सुलगती रूह..'




...


"महफ़िल-ए-मोहब्बत..
ज़र्रा-ज़र्रा..
सुलगती रूह..
मुबारक तुम्हें..
अरमानों की जुस्तजू..!!!"

...

10 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

रश्मि प्रभा... said...

mubarak...

Unknown said...

धन्यवाद रश्मि प्रभा जी..!!

M VERMA said...

कायम रहे 'अरमानों की जुस्तजू'.

Unknown said...

धन्यवाद एम वर्मा जी..!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

shephali said...

bhaut pyari 'अरमानों की जुस्तजू'

- Mere Shabd

sushma verma said...

bhaut khub....

Unknown said...

धन्यवाद मयंक साहब..!!

आभारी हूँ..!!

Unknown said...

धन्यवाद शेफाली जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद सुषमा 'आहुति' जी..!!!