Wednesday, October 19, 2011

'रूह के मेले..'




...


"आओ..
बाँटें..
रूह के मेले..

कब तक रहेंगे..
हम-तुम..
अकेले..!!"


...

8 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

Unknown said...

बाँट लेना सुखकारी है और उस से भी सुखद है ...किसी ऐसे से बांटना जिस से ...आपकी रूह के तार जुड़े हों ..किस्मतवाले होते हैं जिन्हें ये मौके नसीब होते हैं .

SAJAN.AAWARA said...

bahut achcha sandesh mila hai hame,,,,
ab ham bhi baantna sikhenge...
jai hind jai bharat

Anamikaghatak said...

BAHUT CHHOTE ME BADI BAT KAHA DI....BADHIYA

M VERMA said...

सुन्दर ...

Unknown said...

धन्यवाद दी..!!

Unknown said...

धन्यवाद सजन अवारा जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद एना जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद एम वर्मा जी..!!