Friday, October 14, 2011

' साज़िश..'





...


"करते रहे वफ़ा..
ता-उम्र..
उल्फत-ए-तन्हाई..
ज़िंदा हूँ..
फ़क़त..
कोई साज़िश करो..!!!"


...

10 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत उम्दा!

M VERMA said...

बहुत खूब

सागर said...

bhaut khub...

SAJAN.AAWARA said...

koi sajis karo ...
bahut khub
jai hind jai bharat

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति वाह!

Unknown said...

धन्यवाद मयंक साहब..!!

Unknown said...

धन्यवाद एम वर्मा जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद सागर जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद सजन अवारा जी..!!

Unknown said...

धन्यवाद चन्द्र भूषण मिश्र 'गाफिल' जी..!!