Sunday, October 2, 2011

'मासूमियत की बौछारें..'




...


"पहाड़ियों में ढूँढ आई..
बचपन की सौगातें..
हँसी की फुहारें..
और..
मासूमियत की बौछारें..
खिलखिला रहा था..
आसमान का आँगन..
झिलमिला रहा था..
बादलों का आँचल..

जी आई..
आज फिर..

अमूर्त भावनाओं की..
अटूट निशानी..
जीवन की..
अमूल्य कहानी..!!!"

...

22 ...Kindly express ur views here/विचार प्रकट करिए..:

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 04/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

रश्मि प्रभा... said...

waah...

Pallavi said...

बहुत बढ़िया ... समय मिले तो कभी आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://mhare-anubhav.blogspot.com/

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सचमुच! प्रकृति के नैसर्गिक उद्दात्त स्वरुप में ही जीवन का असल व्याप्त है...
सुन्दर अभिव्यक्ति...
सादर..

सागर said...

bhaut khub...

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri said...

बहुत भावपूर्ण गहन प्रस्तुति..सादर !!!

सदा said...

वाह ...बहुत ही बढि़या ।

रेखा said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ..

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद उड़न तश्तरी जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद यशवंत माथुर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद रश्मि प्रभा जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद पल्लवी जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद मयंक साहब..!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद संजय मिश्रा 'हबीब' जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद सागर जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद श्रीप्रकाश डिमरी जी..!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद सदा जी..!!!

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद रेखा जी..!!

M VERMA said...

बहुत खूब .. जीवन की तलाश जारी है

Priyankaabhilaashi said...

धन्यवाद एम वर्मा जी..!!